श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.76.40 
ततो दु:शासनो राजन् द्रौपद्या वसनं बलात्।
सभामध्ये समाक्षिप्य व्यपाक्रष्टुं प्रचक्रमे॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तब दु:शासन ने भरी सभा में द्रौपदी के वस्त्र बलपूर्वक पकड़ लिए और उन्हें खींचने लगा।
 
King! Then Dushasan forcibly grabbed Draupadi's clothes and began pulling them in front of the crowded assembly. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)