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श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.76.39 
तच्छ्रुत्वा पाण्डवा: सर्वे स्वानि वासांसि भारत।
अवकीर्योत्तरीयाणि सभायां समुपाविशन्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! कर्ण की बात सुनकर सब पाण्डव अपने ऊपरी वस्त्र उतारकर सभा में बैठ गये।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing Karna's words all the Pandavas took off their upper garments and sat in the assembly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)