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mahabharat 2.76.29: हे धृतराष्ट्रपुत्र! तुम अपनी मूर्खता के कारण ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हो; क्योंकि बालक होकर भी तुम भरी सभा में वृद्धों की भाँति बातें करते हो।   |   mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.76.29 
त्वं तु केवलबाल्येन धार्तराष्ट्र विदीर्यसे।
यद् ब्रवीषि सभामध्ये बाल: स्थविरभाषितम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे धृतराष्ट्रपुत्र! तुम अपनी मूर्खता के कारण ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हो; क्योंकि बालक होकर भी तुम भरी सभा में वृद्धों की भाँति बातें करते हो।
 
O son of Dhritarashtra! You are hitting your own feet with an axe only because of your foolishness; because even though you are a child, you talk like an old man in a crowded assembly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)