Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.76.26: जब कोलाहल शांत हो गया, तब क्रोध से अचेत हुए राधानन्दन कर्ण ने उसकी सुन्दर भुजा पकड़ ली और इस प्रकार बोले।   |   mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.76.26 
तस्मिन्नुपरते शब्दे राधेय: क्रोधमूर्च्छित:।
प्रगृह्य रुचिरं बाहुमिदं वचनमब्रवीत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जब कोलाहल शांत हो गया, तब क्रोध से अचेत हुए राधानन्दन कर्ण ने उसकी सुन्दर भुजा पकड़ ली और इस प्रकार बोले।
 
When the uproar subsided, Radhanandan Karna, unconscious with anger, held her beautiful arm and spoke thus.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)