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mahabharat 2.76.18: उन सब राजाओं से बार-बार अनुरोध करने पर भी जब उन्हें कोई उत्तर न मिला, तब विकर्ण ने हाथ मलकर गहरी साँस लेकर कहा -॥18॥   |   mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.76.18 
उक्त्वा सकृत् तथा सर्वान् विकर्ण: पृथिवीपतीन्।
पाणौ पाणिं विनिष्पिष्य नि:श्वसन्निदमब्रवीत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उन सब राजाओं से बार-बार अनुरोध करने पर भी जब उन्हें कोई उत्तर न मिला, तब विकर्ण ने हाथ मलकर गहरी साँस लेकर कहा -॥18॥
 
When he did not receive any reply even after repeatedly requesting all those kings, Vikarna rubbed his hands and took a deep breath said -॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)