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mahabharat 2.76.10: भीमसेन बोले - अर्जुन! यदि मैं यह न जानता होता कि इसका यह कार्य क्षत्रिय धर्म के अनुकूल है, तो मैं इसकी दोनों भुजाओं को प्रज्वलित अग्नि में बलपूर्वक जलाकर भस्म कर देता॥10॥   |   mahabharat अध्याय 2.76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 76: भीमसेनका क्रोध एवं अर्जुनका उन्हें शान्त करना, विकर्णकी धर्मसंगत बातका कर्णके द्वारा विरोध, द्रौपदीका चीरहरण एवं भगवान‍्द्वारा उसकी लज्जारक्षा तथा विदुरके द्वारा प्रह्लादका उदाहरण देकर सभासदोंको विरोधके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.76.10 
भीमसेन उवाच
एवमस्मिन् कृतं विद्यां यदि नाहं धनंजय।
दीप्तेऽग्नौ सहितौ बाहू निर्दहेयं बलादिव॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन बोले - अर्जुन! यदि मैं यह न जानता होता कि इसका यह कार्य क्षत्रिय धर्म के अनुकूल है, तो मैं इसकी दोनों भुजाओं को प्रज्वलित अग्नि में बलपूर्वक जलाकर भस्म कर देता॥10॥
 
Bhimasena said - Arjun! If I had not known that his action was in accordance with Kshatriya Dharma, then I would have forcefully burnt both his arms together in the blazing fire and reduced them to ashes.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)