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mahabharat 2.75.9-10: वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! प्रतिकामी ने सभा में जाकर राजाओं के बीच बैठे हुए युधिष्ठिर से द्रौपदी की बातें कहीं। उसने कहा- 'द्रौपदी आपसे पूछना चाहती है कि इनमें से किस वस्तु का स्वामी होते हुए भी आपने मुझे परास्त किया है? पहले आपने स्वयं को परास्त किया है या मुझे?'॥9-10॥   |   mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  2.75.9-10 
वैशम्पायन उवाच
सभां गत्वा स चोवाच द्रौपद्यास्तद् वचस्तदा।
युधिष्ठिरं नरेन्द्राणां मध्ये स्थितमिदं वच:॥ ९॥
कस्येशो न: पराजैषीरिति त्वामाह द्रौपदी।
किं नु पूर्वं पराजैषीरात्मानमथवापि माम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! प्रतिकामी ने सभा में जाकर राजाओं के बीच बैठे हुए युधिष्ठिर से द्रौपदी की बातें कहीं। उसने कहा- 'द्रौपदी आपसे पूछना चाहती है कि इनमें से किस वस्तु का स्वामी होते हुए भी आपने मुझे परास्त किया है? पहले आपने स्वयं को परास्त किया है या मुझे?'॥9-10॥
 
Vaishampayana says- Janamejaya! Pratikaami went to the assembly and told Draupadi's words to Yudhishthira who was sitting among the kings. She said- 'Draupadi wants to ask you that despite being the master of which of these things, you have defeated me? Have you defeated yourself first or me?'॥9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)