Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.75.6: प्रतिकामी बोली - राजकुमारी! जब जुआरियों को देने के लिए कुछ भी धन नहीं बचा, तब अजातशत्रु पांडवपुत्र युधिष्ठिर ने इस प्रकार जुआ खेलना आरम्भ किया। पहले उसने अपने भाइयों को, फिर स्वयं को और अन्त में तुम्हें भी दांव पर लगा दिया। | mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रतिकामी बोली - राजकुमारी! जब जुआरियों को देने के लिए कुछ भी धन नहीं बचा, तब अजातशत्रु पांडवपुत्र युधिष्ठिर ने इस प्रकार जुआ खेलना आरम्भ किया। पहले उसने अपने भाइयों को, फिर स्वयं को और अन्त में तुम्हें भी दांव पर लगा दिया।
Pratikaami said - Princess! When there was no money left to give to the gamblers, then Ajatashatru Pandava's son Yudhishthira started gambling in this manner. First he staked his brothers, then himself and finally you too.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥