श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  2.75.54 
तां कृष्यमाणां च रजस्वलां च
स्रस्तोत्तरीयामतदर्हमाणाम्।
वृकोदर: प्रेक्ष्य युधिष्ठिरं च
चकार कोपं परमार्तरूप:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
कृष्ण को रजस्वला अवस्था में घसीटा जा रहा था, उनके सिर का वस्त्र खिसक गया था, वे इस अपमान के योग्य नहीं थीं। उन्हें ऐसी दयनीय स्थिति में देखकर भीमसेन को बहुत दुःख हुआ। वे युधिष्ठिर की ओर देखकर अत्यंत क्रोधित हुए। 54.
 
Krishna was being dragged in her menstrual state, her head cloth had slipped, she was not worthy of such humiliation. Bhimasena was very pained to see her in such a bad condition. He became very angry looking at Yudhishthira. 54.
 
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि द्यूतपर्वणि द्रौपदीप्रश्ने सप्तषष्टितमोऽध्याय:॥ ६७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत द्यूतपर्वमें द्रौपदीप्रश्नविषयक सरसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६७॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ५६ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)