श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.75.53 
वैशम्पायन उवाच
तथा ब्रुवन्तीं करुणं रुदन्ती-
मवेक्षमाणां कृपणान् पतींस्तान्।
दु:शासन: परुषाण्यप्रियाणि
वाक्यान्युवाचामधुराणि चैव॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, 'हे जनमेजय! इस प्रकार द्रौपदी अपने बेचारे पतियों की ओर देखकर रोने लगी। उस समय दु:शासन ने उससे बहुत से अप्रिय, कठोर और कटु वचन कहे।'
 
Vaishampayana says, 'O Janamejaya! Thus Draupadi started crying and looking at her poor husbands. At that time Dushasan said many unpleasant, harsh and bitter words to her. 53.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)