श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.75.52 
तिष्ठन्ति चेमे कुरव: सभाया-
मीशा: सुतानां च तथा स्नुषाणाम्।
समीक्ष्य सर्वे मम चापि वाक्यं
विब्रूत मे प्रश्नमिमं यथावत्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
सभा में बैठे हुए ये कुरुवंशी महापुरुष, सबके पुत्र-पुत्रियाँ हैं (सबके घर में पुत्र-पुत्रियाँ होती हैं), इसलिए वे सब मेरी कही हुई बात पर ध्यानपूर्वक विचार करें और इस प्रश्न पर ठीक प्रकार से विचार करें ॥ 52॥
 
These great men of the Kuru dynasty sitting in the assembly, all have sons and daughters-in-law (everyone has sons and daughters-in-law in their homes), therefore all of them should carefully ponder over what I have said and discuss this question correctly. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)