श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  2.75.50 
द्रौपद्युवाच
आहूय राजा कुशलैरनार्यै-
र्दुष्टात्मभिर्नैकृतिकै: सभायाम्।
द्यूतप्रियैर्नातिकृतप्रयत्न:
कस्मादयं नाम निसृष्टकाम:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी बोलीं—जुए में निपुण असभ्य, दुष्ट, कपटी और धूर्त मनुष्यों ने राजा युधिष्ठिर को सभा में बुलाकर जुआ खेलना आरम्भ कर दिया। वे तो जुए में बहुत पारंगत नहीं हैं। फिर उनके मन में जुआ खेलने की इच्छा क्यों उत्पन्न हुई?॥50॥
 
Draupadi said—The uncivilized, evil-minded, deceitful and cunning people who are expert in gambling, called King Yudhishthira to the court and started playing gambling. He is not very practised in gambling. Then why was the desire to gamble created in his mind?॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)