श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.75.5 
द्रौपद्युवाच
कथं त्वेवं वदसि प्रातिकामिन्
को हि दीव्येद् भार्यया राजपुत्र:।
मूढो राजा द्यूतमदेन मत्तो
ह्यभून्नान्यत् कैतवमस्य किंचित्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी बोली - प्रतिकामिन्! आप ऐसा कैसे कह सकते हैं? कौन राजकुमार अपनी पत्नी को दांव पर लगाकर जुआ खेलेगा? क्या राजा युधिष्ठिर जुए के नशे में इतने उन्मत्त हो गए हैं कि उनके पास जुआरियों को देने के लिए और कोई धन नहीं बचा है?॥5॥
 
Draupadi said - Pratikamin! How can you say such a thing? Which prince will gamble by putting his wife at stake? Has King Yudhishthira gone so mad in the intoxication of gambling that he has no other money left to give to the gamblers?॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)