Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.75.49: यह शकुनि द्यूत-विद्या में मनुष्यों में सबसे अधिक पारंगत है। इसने कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर को प्रेरित करके उसके मन में आपके साथ द्यूत-क्रीड़ा करने की इच्छा उत्पन्न की है। किन्तु युधिष्ठिर इसे शकुनि की चाल नहीं मानते; इसीलिए मैं आपके इस प्रश्न को समझने में असमर्थ हूँ॥49॥ | mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्यूतेऽद्वितीय: शकुनिर्नरेषु
कुन्तीसुतस्तेन निसृष्टकाम:।
न मन्यते तां निकृतिं युधिष्ठिर-
स्तस्मान्न ते प्रश्नमिमं ब्रवीमि॥ ४९॥
अनुवाद
यह शकुनि द्यूत-विद्या में मनुष्यों में सबसे अधिक पारंगत है। इसने कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर को प्रेरित करके उसके मन में आपके साथ द्यूत-क्रीड़ा करने की इच्छा उत्पन्न की है। किन्तु युधिष्ठिर इसे शकुनि की चाल नहीं मानते; इसीलिए मैं आपके इस प्रश्न को समझने में असमर्थ हूँ॥49॥
This Shakuni is the most knowledgeable among men in the art of gambling. He has inspired Kunti's son Yudhishthira and created a desire in his mind to gamble with you. But Yudhishthira does not consider this to be a trick of Shakuni; that is why I am unable to understand this question of yours. ॥ 49॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥