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mahabharat 2.75.45: कर्ण बहुत प्रसन्न हुआ. उन्होंने खूब हंसते हुए दुःशासन के कथन की सराहना की. सुबाला के पुत्र गांधार राजा शकुनि ने भी दुःशासन को बधाई दी। 45.   |   mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.75.45 
कर्णस्तु तद्वाक्यमतीव हृष्ट:
सम्पूजयामास हसन् सशब्दम्।
गान्धारराज: सुबलस्य पुत्र-
स्तथैव दु:शासनमभ्यनन्दत्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
कर्ण बहुत प्रसन्न हुआ. उन्होंने खूब हंसते हुए दुःशासन के कथन की सराहना की. सुबाला के पुत्र गांधार राजा शकुनि ने भी दुःशासन को बधाई दी। 45.
 
Karna was very pleased. Laughing heartily, he praised Dushasan's statement. Gandhara king Shakuni, son of Subala, also congratulated Dushasan. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)