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mahabharat 2.75.44: द्रौपदी को अपने बेचारे पतियों की ओर देखते देख दुशासन ने उसे जोर से हिलाया और जोर से हँसते हुए उसे 'दासियाँ' कहा। उस समय द्रौपदी लगभग बेहोश हो गई। 44.   |   mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  2.75.44 
दु:शासनश्चापि समीक्ष्य कृष्णा-
मवेक्षमाणां कृपणान् पतींस्तान्।
आधूय वेगेन विसंज्ञकल्पा-
मुवाच दासीति हसन् सशब्दम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी को अपने बेचारे पतियों की ओर देखते देख दुशासन ने उसे जोर से हिलाया और जोर से हँसते हुए उसे 'दासियाँ' कहा। उस समय द्रौपदी लगभग बेहोश हो गई। 44.
 
Seeing Draupadi looking at her poor husbands, Dushasan shook her violently and laughing loudly called her 'maid'. At that time Draupadi was almost fainting. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)