श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.75.43 
हृतेन राज्येन तथा धनेन
रत्नैश्च मुख्यैर्न तथा बभूव।
यथा त्रपाकोपसमीरितेन
कृष्णाकटाक्षेण बभूव दु:खम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
पांडवों को अपने राज्य, धन और रत्नों की हानि से उतना दुःख नहीं हुआ जितना द्रौपदी के क्रोधित और व्यंग्यात्मक शब्दों से हुआ।
 
The Pandavas were not as grieved by the loss of their kingdom, wealth and precious stones as by Draupadi's angry and sarcastic words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)