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mahabharat 2.75.40: हाय! धिक्कार है उन्हें! भरतवंश के राजाओं का धर्म तो नष्ट हो ही गया है और क्षत्रियधर्म को जानने वाले इन महापुरुषों का भी आचार नष्ट हो गया है; क्योंकि यहाँ कौरवों का धर्म हनन हो रहा है, फिर भी सभा में बैठे हुए सभी कुरुवंशी चुपचाप देख रहे हैं॥40॥   |   mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  2.75.40 
धिगस्तु नष्ट: खलु भारतानां
धर्मस्तथा क्षत्रविदां च वृत्तम्।
यत्र ह्यतीतां कुरुधर्मवेलां
प्रेक्षन्ति सर्वे कुरव: सभायाम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हाय! धिक्कार है उन्हें! भरतवंश के राजाओं का धर्म तो नष्ट हो ही गया है और क्षत्रियधर्म को जानने वाले इन महापुरुषों का भी आचार नष्ट हो गया है; क्योंकि यहाँ कौरवों का धर्म हनन हो रहा है, फिर भी सभा में बैठे हुए सभी कुरुवंशी चुपचाप देख रहे हैं॥40॥
 
Alas! Shame on them! The Dharma of the kings of the Bharata dynasty has certainly been destroyed and the moral conduct of these great men who knew the Dharma of Kshatriyas has also vanished; because the Dharma of the Kauravas is being violated here, yet all the Kuru clansmen sitting in the assembly are quietly watching it. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)