श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.75.4 
प्रातिकाम्युवाच
युधिष्ठिरो द्यूतमदेन मत्तो
दुर्योधनो द्रौपदि त्वामजैषीत्।
सा त्वं प्रपद्यस्व धृतराष्ट्रस्य वेश्म
नयामि त्वां कर्मणे याज्ञसेनि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
प्रतिकामी बोली—द्रुपद की पुत्री! धर्मराज युधिष्ठिर जुए में उन्मत्त हो गए थे। उन्होंने अपना सब कुछ हारकर तुम्हें दांव पर लगा दिया था। फिर दुर्योधन ने तुम्हें जीत लिया। यज्ञसेनी! अब तुम धृतराष्ट्र के महल में चलो। मैं तुम्हें वहाँ दासी बनाकर काम कराने के लिए ले जा रही हूँ॥ 4॥
 
Pratikaami said—Drupad's daughter! Dharmaraja Yudhishthira had become mad with gambling. He lost everything and put you at stake. Then Duryodhan won you. Yagyaseni! Now you come to Dhritarashtra's palace. I am taking you there to make you work as a maid.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)