Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.75.39: अरे! तुम मुझ रजस्वला स्त्री को इन कौरव योद्धाओं के बीच घसीट रहे हो, यह बहुत ही पाप है। मैं देख रही हूँ कि यहाँ कोई भी तुम्हारे इस पाप की निंदा नहीं कर रहा है। निश्चय ही ये सभी लोग तुम्हारे प्रभाव में हैं। 39. | mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अरे! तुम मुझ रजस्वला स्त्री को इन कौरव योद्धाओं के बीच घसीट रहे हो, यह बहुत ही पाप है। मैं देख रही हूँ कि यहाँ कोई भी तुम्हारे इस पाप की निंदा नहीं कर रहा है। निश्चय ही ये सभी लोग तुम्हारे प्रभाव में हैं। 39.
Oh! You are dragging me, a menstruating woman, amidst these Kaurava warriors, this is a very sinful act. I see that no one here is condemning your evil act. Surely all these people have been influenced by you. 39.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥