श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.75.36 
द्रौपद्युवाच
इमे सभायामुपनीतशास्त्रा:
क्रियावन्त: सर्व एवेन्द्रकल्पा:।
गुरुस्थाना गुरवश्चैव सर्वे
तेषामग्रे नोत्सहे स्थातुमेवम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी बोली, "अरे दुष्ट! इस सभा में सभी बड़े-बड़े लोग बैठे हैं, जो शास्त्रों के विद्वान हैं, परिश्रमी हैं और मेरे पिता के समान इन्द्र के समान तेजस्वी हैं। मैं इस रूप में उनके सामने खड़ी नहीं होना चाहती।"
 
Draupadi said, "Oh wicked one! All the elders are sitting in this assembly, who are scholars of scriptures, are diligent and are as illustrious as Indra, like my father. I do not want to stand before them in this form." 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)