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mahabharat 2.75.34: दु:शासन ने कहा, "द्रौपदी! चाहे तुम रजस्वला हो, एक वस्त्र पहने हो अथवा नग्न हो, हमने तुम्हें जुए में जीता है; अतः तुम हमारी दासी हो गई हो, अतः अब तुम्हें हमारी इच्छानुसार दासियों के बीच रहना होगा।" 34.   |   mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.75.34 
दु:शासन उवाच
रजस्वला वा भव याज्ञसेनि
एकाम्बरा वाप्यथवा विवस्त्रा।
द्यूते जिता चासि कृतासि दासी
दासीषु वासश्च यथोपजोषम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
दु:शासन ने कहा, "द्रौपदी! चाहे तुम रजस्वला हो, एक वस्त्र पहने हो अथवा नग्न हो, हमने तुम्हें जुए में जीता है; अतः तुम हमारी दासी हो गई हो, अतः अब तुम्हें हमारी इच्छानुसार दासियों के बीच रहना होगा।" 34.
 
Dushasan said, "Draupadi! Whether you are menstruating, wearing only one garment or naked, we have won you in gambling; hence you have become our slave, hence now you will have to live among the slaves according to our wish." 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)