Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.75.33: यह सुनकर दु:शासन ने उसके काले बाल कसकर पकड़ लिए और कुछ बड़बड़ाने लगा; इसी बीच यज्ञसेन की पुत्री कृष्णा ने अपनी रक्षा के लिए भगवान कृष्ण को पुकारना शुरू कर दिया, जो सभी पापों का नाश करने वाले, सब पर विजय पाने वाले और मानव रूप में हैं। | mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततोऽब्रवीत् तां प्रसभं निगृह्य
केशेषु कृष्णेषु तदा स कृष्णाम्।
कृष्णं च जिष्णुं च हरिं नरं च
त्राणाय विक्रोशति याज्ञसेनी॥ ३३॥
अनुवाद
यह सुनकर दु:शासन ने उसके काले बाल कसकर पकड़ लिए और कुछ बड़बड़ाने लगा; इसी बीच यज्ञसेन की पुत्री कृष्णा ने अपनी रक्षा के लिए भगवान कृष्ण को पुकारना शुरू कर दिया, जो सभी पापों का नाश करने वाले, सब पर विजय पाने वाले और मानव रूप में हैं।
On hearing this, Dushasan grabbed her black hair tightly and started blabbering something; meanwhile, Yajnasena's daughter Krishna started calling out to Lord Krishna, who destroys all sins, conquers all and is in human form, for her protection.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥