Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.75.32: दुशासन द्वारा खींचे जाने पर द्रौपदी का शरीर झुक गया। उसने धीरे से कहा, "अरे मूर्ख और दुष्ट दुशासन! मैं रजस्वला हूँ और मेरे शरीर पर केवल एक ही वस्त्र है। इस अवस्था में मुझे दरबार में ले जाना अनुचित है।"   |   mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.75.32 
सा कृष्यमाणा नमिताङ्गयष्टि:
शनैरुवाचाथ रजस्वलास्मि।
एकं च वासो मम मन्दबुद्धे
सभां नेतुं नार्हसि मामनार्य॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
दुशासन द्वारा खींचे जाने पर द्रौपदी का शरीर झुक गया। उसने धीरे से कहा, "अरे मूर्ख और दुष्ट दुशासन! मैं रजस्वला हूँ और मेरे शरीर पर केवल एक ही वस्त्र है। इस अवस्था में मुझे दरबार में ले जाना अनुचित है।"
 
Draupadi's body bent down as Dushasan pulled her. She softly said, 'Oh foolish and evil Dushasan! I am menstruating and I have only one piece of clothing on. It is improper to take me to the court in this condition.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)