श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.75.30 
ये राजसूयावभृथे जलेन
महाक्रतौ मन्त्रपूतेन सिक्ता:।
ते पाण्डवानां परिभूय वीर्यं
बलात् प्रमृष्टा धृतराष्ट्रजेन॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
राजसूय महायज्ञ के तल के स्नानागार में मंत्रपूत जल से सिंचित बाल, दुशासन ने पांडवों की वीरता की अवहेलना करके उन्हें बलपूर्वक पकड़ लिया।
 
The hair which was irrigated with Mantraput water in the bath of the bottom of Rajsuya Mahayagya, Dushasana disregarded the bravery of the Pandavas and captured them by force.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)