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mahabharat 2.75.29: तब दु:शासन भी क्रोध से गर्जना करता हुआ बड़े वेग से उसके पीछे दौड़ा और महाराज युधिष्ठिर की पत्नी द्रौपदी के लंबे, नीले और लहराते केश पकड़ लिए।   |   mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.75.29 
ततो जवेनाभिससार रोषाद्
दु:शासनस्तामभिगर्जमान:।
दीर्घेषु नीलेष्वथ चोर्मिमत्सु
जग्राह केशेषु नरेन्द्रपत्नीम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तब दु:शासन भी क्रोध से गर्जना करता हुआ बड़े वेग से उसके पीछे दौड़ा और महाराज युधिष्ठिर की पत्नी द्रौपदी के लंबे, नीले और लहराते केश पकड़ लिए।
 
Then Dushasan also roared with anger and ran after her with great speed. He caught hold of the long, blue and flowing hair of Draupadi, wife of Maharaja Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)