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mahabharat 2.75.28: यह सुनकर द्रौपदी का मन बहुत दुखी हुआ। उसने अपने हाथ से अपना गंदा चेहरा पोंछा। फिर वह उठकर उस ओर दौड़ी जहाँ वृद्ध राजा धृतराष्ट्र की पत्नियाँ बैठी थीं।   |   mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.75.28 
तत: समुत्थाय सुदुर्मना: सा
विवर्णमामृज्य मुखं करेण।
आर्ता प्रदुद्राव यत: स्त्रियस्ता
वृद्धस्य राज्ञ: कुरुपुङ्गवस्य॥ २८॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर द्रौपदी का मन बहुत दुखी हुआ। उसने अपने हाथ से अपना गंदा चेहरा पोंछा। फिर वह उठकर उस ओर दौड़ी जहाँ वृद्ध राजा धृतराष्ट्र की पत्नियाँ बैठी थीं।
 
Hearing this, Draupadi's heart became very sad. She wiped her dirty face with her hand. Then she got up and ran towards the place where the wives of the old King Dhritarashtra were sitting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)