श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.75.27 
एह्येहि पाञ्चालि जितासि कृष्णे
दुर्योधनं पश्य विमुक्तलज्जा।
कुरून् भजस्वायतपत्रनेत्रे
धर्मेण लब्धासि सभां परैहि॥ २७॥
 
 
अनुवाद
पांचाली! आओ, आओ, तुम जुए में जीत गई हो। कृष्ण! अब लज्जा त्यागकर दुर्योधन की ओर देखो। कमल के समान विशाल नेत्रों वाली द्रौपदी! हमने तुम्हें धर्मानुसार प्राप्त किया है, अतः तुम कौरवों की सेवा करो। अब राजसभा में आओ।॥27॥
 
‘Panchali! Come, come, you have been won in gambling. Krishna! Now leave your shyness and look at Duryodhan. Draupadi with eyes as big as lotus! We have obtained you according to Dharma, so you serve the Kauravas. Now come to the royal court.’॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)