श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.75.25 
दुर्योधन उवाच
दु:शासनैष मम सूतपुत्रो
वृकोदरादुद्विजतेऽल्पचेता:।
स्वयं प्रगृह्यानय याज्ञसेनीं
किं ते करिष्यन्त्यवशा: सपत्ना:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा- दु:शासन! मेरा यह सेवक, सारथिपुत्र, बड़ा मूर्ख है। यह भीमसेन से भयभीत है। तुम स्वयं द्रौपदी को यहाँ ले आओ। हमारे शत्रु पाण्डव इस समय हमारे अधीन हैं। वे तुम्हारा क्या बिगाड़ सकते हैं?॥ 25॥
 
Duryodhan said- Dushasan! This servant of mine, the son of a charioteer, is a very foolish person. He is afraid of Bhimasena. You yourself bring Draupadi here. Our enemy Pandavas are under our control right now. What can they do to you?॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)