श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.75.20 
अथ त्वामागतां दृष्ट्वा राजपुत्रीं सभां तदा।
सभ्या: सर्वे विनिन्देरन् मनोभिर्धृतराष्ट्रजम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'तुम्हारी जैसी राजकुमारी को दरबार में प्रवेश करते देख दरबार के सभी सदस्य मन ही मन इस दुर्योधन की निंदा करेंगे।'
 
'Seeing a princess like you entering the court, all the members of the court will silently denounce this Duryodhan.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)