vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न
»
श्लोक 20
श्लोक
2.75.20
अथ त्वामागतां दृष्ट्वा राजपुत्रीं सभां तदा।
सभ्या: सर्वे विनिन्देरन् मनोभिर्धृतराष्ट्रजम्॥ २०॥
अनुवाद
'तुम्हारी जैसी राजकुमारी को दरबार में प्रवेश करते देख दरबार के सभी सदस्य मन ही मन इस दुर्योधन की निंदा करेंगे।'
'Seeing a princess like you entering the court, all the members of the court will silently denounce this Duryodhan.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×