श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  2.75.18-19 
वैशम्पायन उवाच
युधिष्ठिरस्तु तच्छ्रुत्वा दुर्योधनचिकीर्षितम्।
द्रौपद्या: सम्मतं दूतं प्राहिणोद् भरतर्षभ॥ १८॥
एकवस्त्रा त्वधोनीवी रोदमाना रजस्वला।
सभामागम्य पाञ्चालि श्वशुरस्याग्रतो भव॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! दुर्योधन की बात सुनकर युधिष्ठिर ने द्रौपदी के पास एक दूत भेजा जिसे वह जानती थी और उसके द्वारा यह संदेश पहुँचाया गया, 'पांचाल की राजकुमारी! यद्यपि तुम रजस्वला हो और लंगोटी नीचे करके केवल एक वस्त्र धारण किए हुए हो, फिर भी उसी अवस्था में रोती हुई सभा में आओ और अपने श्वसुर के सामने खड़ी हो जाओ।'
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! On hearing what Duryodhan wanted to do, Yudhishthira sent a messenger to Draupadi whom she knew and through him this message was conveyed, 'Princess of Panchala! Although you are menstruating and are wearing only one garment by keeping down your loincloth, still come to the assembly in the same condition weeping and stand before your father-in-law.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)