Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.75.17: द्रौपदी के वचन सुनकर सारथी प्रतिकामी पुनः सभा में गया और द्रौपदी का प्रश्न दोहराया; किन्तु दुर्योधन का हठ जानकर सभी लोग मुँह नीचा करके बैठे रहे और किसी ने कुछ नहीं कहा। | mahabharat अध्याय 2.75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रुत्वा सूतस्तद्वचो याज्ञसेन्या:
सभां गत्वा प्राह वाक्यं तदानीम्।
अधोमुखास्ते न च किंचिदूचु-
र्निर्बन्धं तं धार्तराष्ट्रस्य बुद्ध्वा॥ १७॥
अनुवाद
द्रौपदी के वचन सुनकर सारथी प्रतिकामी पुनः सभा में गया और द्रौपदी का प्रश्न दोहराया; किन्तु दुर्योधन का हठ जानकर सभी लोग मुँह नीचा करके बैठे रहे और किसी ने कुछ नहीं कहा।
On hearing Draupadi's words, the charioteer Pratikami again went into the assembly and repeated Draupadi's question; but knowing Duryodhan's obstinacy, all sat with their faces downcast and no one said anything.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥