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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 75: प्रातिकामीके बुलानेसे न आनेपर दु:शासनका सभामें द्रौपदीको केश पकड़कर घसीटकर लाना एवं सभासदोंसे द्रौपदीका प्रश्न
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श्लोक 13
श्लोक
2.75.13
वैशम्पायन उवाच
स गत्वा राजभवनं दुर्योधनवशानुग:।
उवाच द्रौपदीं सूत: प्रातिकामी व्यथान्वित:॥ १३॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! शत्रु दुर्योधन के वश में था, इसलिए वह महल में गया और द्रौपदी से दुःखी होकर बोला।
Vaishmpayana says: Janamejaya! The enemy was under the control of Duryodhan, so he went to the palace and spoke to Draupadi in an aggrieved manner.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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