Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.74.9: हे कुन्तीपुत्र! तुम किसी वनवासी, गृहस्थ, तपस्वी या विद्वान् से कभी ऐसे कठोर वचन नहीं बोलते। तुम्हारे जैसे कुत्ते के समान स्वभाव वाले लोग ही दूसरों पर इस प्रकार भौंकते हैं॥9॥ | mahabharat अध्याय 2.74: विदुरका दुर्योधनको फटकारना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न किंचिदित्थं प्रवदन्ति पार्था
वनेचरं वा गृहमेधिनं वा।
तपस्विनं वा परिपूर्णविद्यं
भषन्ति हैवं श्वनरा: सदैव॥ ९॥
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! तुम किसी वनवासी, गृहस्थ, तपस्वी या विद्वान् से कभी ऐसे कठोर वचन नहीं बोलते। तुम्हारे जैसे कुत्ते के समान स्वभाव वाले लोग ही दूसरों पर इस प्रकार भौंकते हैं॥9॥
Son of Kunti, you never speak such harsh words to any forest dweller, householder, ascetic or scholar. Only people with a dog-like nature like you always bark at others like this.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥