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mahabharat 2.74.7: मुख से निकले हुए कठोर वचनों के बाणों से आहत व्यक्ति दिन-रात दुःख और चिंता में डूबा रहता है। वे केवल दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं; इसलिए विद्वान व्यक्ति को चाहिए कि वह दूसरों के प्रति कठोर वचनों का प्रयोग न करे। ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 2.74: विदुरका दुर्योधनको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 74: विदुरका दुर्योधनको फटकारना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.74.7 
समुच्चरन्त्यतिवादाश्च वक्त्राद्
यैराहत: शोचति रात्र्यहानि।
परस्य नामर्मसु ते पतन्ति
तान् पण्डितो नावसृजेत् परेषु॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मुख से निकले हुए कठोर वचनों के बाणों से आहत व्यक्ति दिन-रात दुःख और चिंता में डूबा रहता है। वे केवल दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं; इसलिए विद्वान व्यक्ति को चाहिए कि वह दूसरों के प्रति कठोर वचनों का प्रयोग न करे। ॥7॥
 
The person hurt by the arrows of harsh words that come out of the mouth remains immersed in sorrow and worry day and night. They only hurt the feelings of others; hence a learned person should not use harsh words towards others. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)