श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 74: विदुरका दुर्योधनको फटकारना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.74.10 
द्वारं सुघोरं नरकस्य जिह्मं
न बुध्यते धृतराष्ट्रस्य पुत्र:।
तमन्वेतारो बहव: कुरूणां
द्यूतोदये सह दु:शासनेन॥ १०॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्रपुत्र को नरक का अत्यंत भयानक और टेढ़ा-मेढ़ा द्वार दिखाई नहीं दे रहा है। दुशासन सहित अनेक कौरव इस द्यूतक्रीड़ा में दुर्योधन के भागीदार बन गए।
 
Dhritarashtra's son is not seeing the extremely terrifying and crooked gate of hell. Many of the Kauravas along with Dushasan became Duryodhan's partners in this game of dice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)