श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.73.8 
युधिष्ठिर उवाच
पुरं जनपदो भूमिरब्राह्मणधनै: सह।
अब्राह्मणाश्च पुरुषा राजञ्छिष्टं धनं मम।
एतद् राजन् मम धनं तेन दीव्याम्यहं त्वया॥ ८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "हे राजन! ब्राह्मणों को जीविका के लिए जो ग्राम आदि दिए गए हैं, उनको छोड़कर शेष जो नगर, जनपद और भूमि मेरे अधीन हैं तथा जो लोग ब्राह्मण नहीं हैं और मेरे साथ रहते हैं, वे सब मेरी शेष सम्पत्ति हैं। शकुनि! मैं इस सम्पत्ति को दांव पर लगाकर तुम्हारे साथ जुआ खेल रहा हूँ।"
 
Yudhishthira said, "O King! Except for the villages etc. which have been given to the Brahmins for their livelihood, the rest of the cities, districts and lands which are under my control and the people who are not Brahmins and live with me, are all my remaining wealth. Shakune! I am gambling with you by putting this wealth at stake."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)