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mahabharat 2.73.43: धृतराष्ट्र बहुत खुश हुए और बार-बार उनसे पूछते रहे, ‘क्या हमारा पक्ष जीत रहा है?’ वे अपनी खुशी छिपा नहीं सके।   |   mahabharat अध्याय 2.73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.73.43 
धृतराष्ट्रस्तु तं हृष्ट: पर्यपृच्छत् पुन: पुन:।
किं जितं किं जितमिति ह्याकारं नाभ्यरक्षत॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बहुत खुश हुए और बार-बार उनसे पूछते रहे, ‘क्या हमारा पक्ष जीत रहा है?’ वे अपनी खुशी छिपा नहीं सके।
 
Dhritarashtra was very happy and kept asking him, 'Is our side winning?' He could not hide his expression of happiness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)