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mahabharat 2.73.39: हे सुबलपुत्र! मैं सुन्दर एवं रूपवती पांचाल राजकुमारी द्रौपदी को दांव पर लगाकर आपके साथ जुआ खेल रहा हूँ, यद्यपि ऐसा करने में मुझे बहुत कष्ट हो रहा है।   |   mahabharat अध्याय 2.73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.73.39 
तयैवंविधया राजन् पाञ्चाल्याहं सुमध्यया।
ग्लहं दीव्यामि चार्वङ्गॺा द्रौपद्या हन्त सौबल॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे सुबलपुत्र! मैं सुन्दर एवं रूपवती पांचाल राजकुमारी द्रौपदी को दांव पर लगाकर आपके साथ जुआ खेल रहा हूँ, यद्यपि ऐसा करने में मुझे बहुत कष्ट हो रहा है।
 
O son of Subala, I am gambling with you by putting the beautiful and beautiful Panchala princess Draupadi at stake, although I am suffering a lot in doing so.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)