श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.73.32 
शकुनिरुवाच
अस्ति ते वै प्रिया राजन् ग्लह एकोऽपराजित:।
पणस्व कृष्णां पाञ्चालीं तयाऽऽत्मानं पुनर्जय॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शकुनि ने पुनः कहा, "हे राजन! आपकी प्रियतमा द्रौपदी एक ऐसा जुआ है, जिसे आपने अब तक नहीं हारा है; अतः पांचाल राजकुमारी कृष्णा को दांव पर लगाइए और उसके माध्यम से स्वयं को पुनः जीत लीजिए।"
 
Thereafter Shakuni again said, "O King! Your beloved Draupadi is a gamble which you have not lost till now; therefore put the Panchala princess Krishna at stake and win yourself again through her."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)