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mahabharat 2.73.30: शकुनि ने फिर कहा - हे राजन! तुमने अपने आप को दांव पर लगा दिया और हार गए, यह तुम्हारा बहुत बड़ा पाप है। धन रहते हुए अपने आप को हार जाना बहुत बड़ा पाप है।   |   mahabharat अध्याय 2.73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.73.30 
शकुनिरुवाच
एतत् पापिष्ठमकरोर्यदात्मानमहारय:।
शिष्टे सति धने राजन् पाप आत्मपराजय:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
शकुनि ने फिर कहा - हे राजन! तुमने अपने आप को दांव पर लगा दिया और हार गए, यह तुम्हारा बहुत बड़ा पाप है। धन रहते हुए अपने आप को हार जाना बहुत बड़ा पाप है।
 
Shakuni again said - O King! You have put yourself at stake and lost, this is a very sinful act on your part. It is a great sin to lose yourself while having money left.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)