श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.73.29 
वैशम्पायन उवाच
एतच्छ्रुत्वा व्यवसितो निकृतिं समुपाश्रित:।
जितमित्येव शकुनिर्युधिष्ठिरमभाषत॥ २९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! यह सुनकर कपटी शकुनि ने पूर्ण विश्वास के साथ अपनी विजय घोषित की और युधिष्ठिर से कहा - 'यह चाल भी मैंने जीत ली।'
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! On hearing this, the deceitful Shakuni declared his victory with full confidence and said to Yudhishthira - 'I won this move as well.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)