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mahabharat 2.73.23: शकुनि ने फिर कहा- हे राजन! समस्त पाण्डवों में से वीर धनुर्धर सव्यसाची अर्जुन को मैंने जीत लिया है। पाण्डवपुत्र! अब तुम्हारे पास जुआरियों द्वारा प्राप्त धन के रूप में केवल भीमसेन ही बचा है, अतः उसे दांव पर लगाकर खेलो॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 2.73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.73.23 
शकुनिरुवाच
अयं मया पाण्डवानां धनुर्धर:
पराजित: पाण्डव: सव्यसाची।
भीमेन राजन् दयितेन दीव्य
यत् कैतवं पाण्डव तेऽवशिष्टम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
शकुनि ने फिर कहा- हे राजन! समस्त पाण्डवों में से वीर धनुर्धर सव्यसाची अर्जुन को मैंने जीत लिया है। पाण्डवपुत्र! अब तुम्हारे पास जुआरियों द्वारा प्राप्त धन के रूप में केवल भीमसेन ही बचा है, अतः उसे दांव पर लगाकर खेलो॥ 23॥
 
Shakuni again said- O King! Of all the Pandavas, the brave archer Savyasachi Arjun has been conquered by me. Son of Pandava! Now you have only Bhimsen left in the form of money obtained by gamblers, so play by placing him at stake.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)