श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.73.21 
युधिष्ठिर उवाच
यो न: संख्ये नौरिव पारनेता
जेता रिपूणां राजपुत्रस्तरस्वी।
अनर्हता लोकवीरेण तेन
दीव्याम्यहं शकुने फाल्गुनेन॥ २१॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, 'शकुन! यद्यपि यशस्वी एवं पराक्रमी राजकुमार अर्जुन, जो हमें नौका के समान युद्धरूपी समुद्र से पार ले जाकर शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले हैं, दाव पर लगाने योग्य नहीं हैं, तथापि मैं उन्हें दाव पर लगाकर तुम्हारे साथ खेल रहा हूँ।
 
Yudhishthira said, 'Shakuna! Though the famous and valiant prince Arjuna, who is going to take us across the sea of war like a boat and conquer our enemies, is not worth being staked, yet I am putting him at stake and playing with you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)