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mahabharat 2.73.20: धर्मराज युधिष्ठिर! जुआरी लोग पागलपन में जुआ खेलते समय जो बकवास करते हैं, वह न तो स्वप्न में दिखाई देता है और न ही जाग्रत अवस्था में।   |   mahabharat अध्याय 2.73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.73.20 
स्वप्ने तानि न दृश्यन्ते जाग्रतो वा युधिष्ठिर।
कितवा यानि दीव्यन्त: प्रलपन्त्युत्कटा इव॥ २०॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज युधिष्ठिर! जुआरी लोग पागलपन में जुआ खेलते समय जो बकवास करते हैं, वह न तो स्वप्न में दिखाई देता है और न ही जाग्रत अवस्था में।
 
Dharmaraja Yudhishthira! The nonsense that gamblers utter while gambling in a fit of madness is neither seen in their dreams nor in their waking state.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)