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स्वप्ने तानि न दृश्यन्ते जाग्रतो वा युधिष्ठिर।
कितवा यानि दीव्यन्त: प्रलपन्त्युत्कटा इव॥ २०॥
अनुवाद
धर्मराज युधिष्ठिर! जुआरी लोग पागलपन में जुआ खेलते समय जो बकवास करते हैं, वह न तो स्वप्न में दिखाई देता है और न ही जाग्रत अवस्था में।
Dharmaraja Yudhishthira! The nonsense that gamblers utter while gambling in a fit of madness is neither seen in their dreams nor in their waking state.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥