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mahabharat 2.73.19: शकुनि ने कहा- हे राजन! जो मनुष्य धन के लोभ से पाप करता है, वह नरक के गड्ढे में गिरता है। अत्यन्त उन्मत्त मनुष्य लकड़ी का लट्ठा बन जाता है। आप वृद्ध हैं और उत्तम गुणों से युक्त हैं। हे भरतवंश के रत्न! आपको नमस्कार है।   |   mahabharat अध्याय 2.73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.73.19 
शकुनिरुवाच
गर्ते मत्त: प्रपतते प्रमत्त: स्थाणुमृच्छति।
ज्येष्ठो राजन् वरिष्ठोऽसि नमस्ते भरतर्षभ॥ १९॥
 
 
अनुवाद
शकुनि ने कहा- हे राजन! जो मनुष्य धन के लोभ से पाप करता है, वह नरक के गड्ढे में गिरता है। अत्यन्त उन्मत्त मनुष्य लकड़ी का लट्ठा बन जाता है। आप वृद्ध हैं और उत्तम गुणों से युक्त हैं। हे भरतवंश के रत्न! आपको नमस्कार है।
 
Shakuni said- O King! A man who commits sins due to greed for money falls into the pit of hell. A man who is too mad becomes a log of wood. You are old in age and have the best qualities. O jewel of the Bharat dynasty! Salutations to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)