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mahabharat 2.73.18: युधिष्ठिर बोले, "हे मूर्ख! तुम निश्चय ही अधर्म का आचरण कर रहे हो, तुम न्याय की ओर देखते ही नहीं। तुम हमारे शुद्ध हृदय वाले भाइयों में फूट डालना चाहते हो।"   |   mahabharat अध्याय 2.73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.73.18 
युधिष्ठिर उवाच
अधर्मं चरसे नूनं यो नावेक्षसि वै नयम्।
यो न: सुमनसां मूढ विभेदं कर्तुमिच्छसि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "हे मूर्ख! तुम निश्चय ही अधर्म का आचरण कर रहे हो, तुम न्याय की ओर देखते ही नहीं। तुम हमारे शुद्ध हृदय वाले भाइयों में फूट डालना चाहते हो।"
 
Yudhishthira said, "O fool! You are certainly behaving in an unrighteous manner, you do not look at justice. You want to create a rift among our pure hearted brothers."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)