Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.73.15: युधिष्ठिर ने कहा, "यह सहदेव धर्म का उपदेश देते हैं। संसार में इनकी ख्याति विद्वान पुरुष के रूप में है। यद्यपि मेरे प्रिय राजकुमार सहदेव जुआ खेलने के योग्य नहीं हैं, फिर भी मैं उनके साथ इस प्रकार जुआ खेलता हूँ मानो वे कोई अप्रिय वस्तु हों।" 15. | mahabharat अध्याय 2.73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर ने कहा, "यह सहदेव धर्म का उपदेश देते हैं। संसार में इनकी ख्याति विद्वान पुरुष के रूप में है। यद्यपि मेरे प्रिय राजकुमार सहदेव जुआ खेलने के योग्य नहीं हैं, फिर भी मैं उनके साथ इस प्रकार जुआ खेलता हूँ मानो वे कोई अप्रिय वस्तु हों।" 15.
Yudhishthira said, "This Sahadeva preaches the principles of religion. He is renowned in the world as a learned man. Although my dear prince Sahadeva is not fit to be gambled, still I gamble with him as if he were an unpleasant object." 15.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥