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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना
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श्लोक 13
श्लोक
2.73.13
शकुनिरुवाच
प्रियस्ते नकुलो राजन् राजपुत्रो युधिष्ठिर।
अस्माकं वशतां प्राप्तो भूय: केनेह दीव्यसे॥ १३॥
अनुवाद
शकुनि बोले—धर्मराज युधिष्ठिर! आपके परमप्रिय राजकुमार नकुल हमारे अधीन हो गए हैं, अब आप यहाँ किस धन से खेल रहे हैं?॥13॥
Shakuni said—Dharmaraj Yudhishthira! Your most beloved prince Nakul has become our subordinate, with what money are you playing here now?॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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