श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 73: युधिष्ठिरका धन, राज्य, भाइयों तथा द्रौपदीसहित अपनेको भी हारना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.73.10 
युधिष्ठिर उवाच
राजपुत्रा इमे राजञ्छोभन्ते यैर्विभूषिता:।
कुण्डलानि च निष्काश्च सर्वं राजविभूषणम्।
एतन्मम धनं राजंस्तेन दीव्याम्यहं त्वया॥ १०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "हे राजन! ये राजकुमार जिन आभूषणों से सुशोभित हैं, कुण्डल, स्वर्णमय गले के आभूषण आदि सब राजसी आभूषण हैं, ये सब मेरे धन हैं। मैं इन्हें दांव पर लगाकर आपके साथ खेल रहा हूँ।"
 
Yudhishthira said, "O King! The ornaments with which these princes are adorned, the earrings, the golden neck ornaments etc. are all royal ornaments, all of which are my wealth. I am putting them at stake and playing with you."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)